क्या आप मानते हैं ‍धर्म की मनमानी व्याख्या पर रोक लगनी चाहिए?
05-09-09 (04:03 PM)
mgopal
धर्म पर म न मनी रो क ल ग ना चा हीये, आप ठीक क ह ते है,
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22-08-09 (09:50 AM)
Vivek ranjan Shrivastava
हिन्दू धर्म कट्टर,किताबी नही है ...
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10-07-09 (11:05 AM)
yogendra
हिंदू एक धर्म है इसकी चार प्रमुख शाखाये है धर्म अर्थ काम मोक्ष .वास्तव में धर्म एक मनुष्य का संपूर्ण जीवन दर्शन होता है धर्म ही जीवन जिने का एक रास्ता होता है हम जीवन जीना और धर्म को अलग रखकर नही चल सकते जैसा कि लेखक ने लिखा है .आप किसी भी धार्मिक ग्रंथों को उथाकर देख लीजिए उसमें जीवन जिने संबंधित बातें ही लिखी जरुर मिलेंगि. आप उपनिषदों एवम पुराणोंको देख सकते हैउसमे अर्थोपर्जन , काम एवम मोक्ष कि बातें जरूर मिलेंगी.असल में हमारी गलती है कि हम पूजा पाठ को ही धर्म समझ कर उल्जलुल बातें करते है जबकि धर्म का दायेरा विस्तृत और अपरिभशित है.चूँकि हिंदू धर्म में लोगो को विचार रखने कि छूट है ( अन्य धर्मो में नहि ) इसलिए ये बातें रखी जाती है
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25-06-09 (11:11 AM)
ravikant sharma
अपने धर्म को श्रेष्ठ बताने वाले और उस पर व्याख्या करने वाले अधर्मी होते है |
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17-06-09 (04:11 PM)
Rakesh Kumar Gupta
धर्म व्यक्तिगत आस्था और विश्वास का मामला है 1 इसलिये इसमे तथाकथित धर्म के ठेकेदारो एवं धर्मगुरूवो आदि के हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नही है 1 आवश्यकता धर्म की मनमानी व्याख्या पर रोक लगाने की बजाय लोगो को जागरूक बनाने की है 1
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