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श्मशान घाट को धार्मिक स्थल माना जाना उचित है?
बहस में भाग लीजिए
15-08-09 (05:39 PM)
jayendra singh
good
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14-07-09 (12:44 PM)
manisha
हा क्यकि मदिर तो रोज जया जता है जब तक हम जिंदा रहते है लकिन मर्ने के बाद सम्सन ही मदिर स्मन सम्जा जता है क्यकि सम्सन मै हम्रे सरिर को मुक्ति मिलते है जो जिंदा रह कर और रोज मन्दिर जाकर हमे नही मिलतति
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11-06-09 (01:38 PM)
raja
जी हा ये एक उतना ही धार्मिक प्रभाव वाला है जितना कि और कोई यही पर आ कर आप अपने शरीर की अंतिम गति का दर्शन पा कर सारी अभिलाशाए भूल जाते है, यही खड़े हो कर आप का स्वार्थ अपने आप को निर्बल और असहाय मेहसूस करता है और यहा पर मन भी सरलता से एकाग्र हो कर प्रभु को स्मरण कर पाता है कही लिखा है कि श्री स्वामी विवेकानन्द जी ने अपने गुरु द्वारा बताई एक साधना शमशान की ही भूमि पर की थी क्या अब भी ये धार्मिक प्रभाव वाला स्थान न हुआ ?
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08-06-09 (03:33 AM)
Rinzi Dorge
Manushya apni soch se hi pavitra aur apavitra ka har ek karam ko karta hai aur yah aaj ki baat nahi hai anant kaal se hi iski rachna ek saath huwi hai. Jaise jab maran hai toh jeevan bhi hota hai aur isi ke saath bani hai pavitra aur apavitra. Lekin sahi maine me yah sab manushya ne hi apne udeshya ke liye rachna ki hai. Isliye main is rachna ko bhi ek saath svikar karta hun. Main mandir, ganga (pavitra) aur shamshan ko apvitra nahin manta.
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06-04-09 (05:07 PM)
amit solanki
यह बात सही है
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